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ततश्री

तट श्री का अर्थ और भावार्थ तट श्री दो शब्दों से मिलकर बना है तत्व श्री तत्व का अर्थ है वह परम तत्व ब्रह्मा जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता श्री का अर्थ है शोभा ऐश्वर्या मंगल दिव्या सत श्री केवल एक नाम नहीं बल्कि सनातन चेतन की ओर ले जाने वाला एक पत्र है यह उन मां सभी साध को श्रद्धालु और जिज्ञासुओं के लिए जो भगवान श्री कृष्ण भगवान शिव सनातन धर्म और भारत की पवित्र तीर्थ परंपरा को गहराई से समझाना चाहते हैं यहां हम आस्था को ज्ञान से और परंपरा को इतिहास से जोड़ते हैं | दत्ता श्री वेबसाइट का उद्देश्य उद्देश्य क्या है हमारे वेबसाइट का नंबर वन सनातन धर्म से जुड़ी जिज्ञासा का समाधान नंबर 2 भगवान शिव भगवान कृष्ण भगवान श्री राम वैन देवी देवताओं के तत्व ज्ञान का सरल वर्णन नंबर 3 भारत के प्राचीन मंदिरों और स्थिर स्थलों का प्रमाणिक जानकारी नंबर 4 श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा की सही दिशा निर्देशित करना | हम सबसे पहले शुरुआत करते हैं श्री कृष्ण की पवित्र नगरी, श्री कृष्ण के चरण स्पर्श जिस जगह ने किया सुंदर नाम वृंदावन, आखिर वृंदावन क्या है? कहां पर है? किस तरीके से यह सनातन धर्म का एक अभिन्न अंग है? श्री कृष्ण ने जहां पर अपना बचपन बिताया वह नंद गांव, श्री कृष्ण ने जिस पर्वत को उठाया वह पर्वतमाला, हमारी राधा रानी (लाडली जी) जहां पर विराजमान आज भी है ,(बरसाना)| हम इन सभी को एक-एक करके इनके मनमोहन व सुंदर दृश्य आनंद लेंगे | पहले जानते हैं बांके बिहारी मंदिर की स्थापना के बारे में बांके बिहारी मंदिर के बारे में कहा जाता है यह 1964 के समय बनाया गया था | बांके बिहारी जी स्वयं निवेदन में विराजमान थे इस मंदिर को बनाने के पीछे भी एक रोचक कहानी है| यह स्वयं श्री हरिदास जी के द्वारा बनाया गया था| हरिदास जी स्वयं निधिवन में रहते थे| हरिदास जी के बारे में यदि बताया जाए तो एक महान संत थे,और श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे, श्री कृष्ण के नाम की हमेशा गाना गया करते थे, भजन गायक करते थे| बाद में भक्तों के आग्रह पर उन्होंने मूर्ति को इस मंदिर में स्थापित किया| मंदिर की वस्तु कला साधन है, लेकिन यदि ध्यान से देखा जाए तो आप इस मंदिर को देखकर ही भाव में आ जाते हैं| इस मंदिर के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यहां पर अक्सर पर्दा गिराया जाता है, उसके पीछे भी मान्यता यह है कि श्री कृष्ण जी को यदि लगातार देखा जाए तो कृष्ण जी अपने भक्तों के प्यार में आ जाते हैं और वह भक्तों के साथ ही मंदिर से बाहर चले जाते हैं| इस मंदिर की और एक खासियत यह बताई जाती है यहां पर शंकर और घंटा भी नहीं बजाया जाता उसके पीछे का कारण भी यही है कि बांके बिहारी जी को यहां पर बाल स्वरूप में माना जाता है| घंटी और शंकर की ध्वनि उन्हें कष्ट दे सकती है, डरा सकती है, इस वजह से यहां पर घंटी और शंकर को नहीं बजाया जाता| याद तक यहां पर सुबह की आरती सेवा भी नहीं होती,यह आरती सेवा नहीं बल्कि यहां पर सेवा भाव को दर्शाया जाता है| भगवान को भोग लगाया जाता है, श्रृंगार किया जाता है, और दर्शन सब घरेलू प्रेम की तरह ही किया जाता है|